Kesari Chapter 2 Movie Review-बॉलीवुड में देशभक्ति, राष्ट्रवाद और जोश से भरी फिल्मों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हर हफ्ते हमें ऐसी फिल्में देखने को मिलती हैं, जो हमारे वीर जवानों के बलिदान और भारत के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाती हैं। इस बार धर्मा प्रोडक्शन्स लेकर आया है केसरी चैप्टर 2: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ जलियांवाला बाग। आइए, इस फिल्म के रिव्यू में जानते हैं कि यह फिल्म कितनी खास है।

केसरी चैप्टर 2: कहानी और पृष्ठभूमि
सबसे पहले यह स्पष्ट कर दें कि केसरी चैप्टर 2 पहली केसरी फिल्म का सीधा सीक्वल नहीं है, जो सरगढ़ी की लड़ाई पर आधारित थी। दोनों फिल्मों का एकमात्र समान सूत्र है अक्षय कुमार और उनकी अदम्य साहस की कहानी। लेकिन यह फिल्म केवल देशभक्ति और जोशीले डायलॉग्स तक सीमित नहीं है। यह एक ऐतिहासिक कोर्टरूम ड्रामा है, जो इसे अन्य देशभक्ति फिल्मों से अलग बनाती है।
फिल्म की शुरुआत 13 अप्रैल, 1919 के उस काले दिन से होती है, जब जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ। बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में सिख समुदाय के लोग रॉलेट एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करने एकत्र हुए थे। फिल्म में हमें एक युवा लड़के बरकत सिंह की कहानी दिखाई जाती है, जो अपनी मां और छोटी बहन के साथ वहां मौजूद है। अचानक जनरल रेजिनाल्ड डायर अपने सैनिकों के साथ आता है और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवा देता है। इस नरसंहार में बरकत की मां और बहन की मौत हो जाती है, और वह लाशों के ढेर के नीचे छिपकर बचता है।
खास बात: जलियांवाला बाग नरसंहार का चित्रण इतना मार्मिक है कि यह दर्शकों को असहज कर देता है। हालांकि, यह शूजित सरकार की सरदार उधम जितना प्रभावशाली नहीं है, फिर भी यह फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा है।
कहानी का मुख्य आधार: जस्टिस संकरन नायर
फिल्म की दूसरी कहानी जस्टिस संकरन नायर (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो वायसराय काउंसिल में एकमात्र भारतीय बैरिस्टर हैं। वह अक्सर ब्रिटिश हितों के लिए भारतीयों के खिलाफ केस लड़ते हैं। लेकिन बरकत से उनकी मुलाकात उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लाती है। बरकत अपनी मां और बहन के लिए इंसाफ की मांग करता है, जिससे संकरन को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होता है।
संकरन जल्द ही जनरल डायर की मंशा को समझ लेते हैं और उसके खिलाफ कोर्ट में लड़ने का फैसला करते हैं। दूसरी ओर, वायसराय काउंसिल संकरन के खिलाफ एक कुशल वकील नेविल मैककिनले (आर माधवन) को लाती है। कोर्टरूम में संकरन और नेविल के बीच का टकराव फिल्म का दूसरा हिस्सा है, जो दर्शकों को बांधे रखता है।
क्या है खास?
शानदार अभिनय: अक्षय कुमार ने जस्टिस संकरन नायर के किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। उनकी पिछली कुछ फिल्मों में वह अपने प्रशंसकों को प्रभावित नहीं कर पाए थे, लेकिन इस फिल्म में वह पूरे दमखम के साथ नजर आए।
आर माधवन का प्रभावशाली प्रदर्शन: नेविल मैककिनले के रूप में माधवन ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। वह अक्षय के सामने भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे।
अनन्या पांडे की मेहनत: दिलरीत गिल के किरदार में अनन्या ने बेहतरीन काम किया। पुरुष-प्रधान कोर्टरूम में वह अपनी जगह बनाती हैं।
मसाबा गुप्ता की सरप्राइज परफॉर्मेंस: मसाबा ने एक कैबरे डांसर के किरदार में सबको चौंका दिया। उनकी बोल्ड और आकर्षक प्रस्तुति फिल्म का आकर्षण है।
गीत और संगीत: ‘ओ शेरा तीर ते ताज’ गाना फिल्म के ड्रामाई प्रभाव को बढ़ाता है और लंबे समय तक याद रहता है।
कमियां
फिल्म की शुरुआत शानदार है, लेकिन कहानी को स्थापित करने में थोड़ा समय लगता है। कुछ हिस्सों में गति धीमी पड़ती है। साथ ही, रेजिना कैसेंड्रा जैसे किरदारों को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला।
क्या आपको देखनी चाहिए?
अगर आप कोर्टरूम ड्रामा और ऐतिहासिक फिल्मों के शौकीन हैं, तो केसरी चैप्टर 2 आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह फिल्म भले ही अपने жанर की सर्वश्रेष्ठ न हो, लेकिन यह निश्चित रूप से मनोरंजन करती है। निर्देशक करण सिंह त्यागी की मेहनत और कलाकारों का शानदार प्रदर्शन इसे देखने लायक बनाता है।
रेटिंग: 3.5/5
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